संपादकीय

Ram Mandir: राम तो आ गए अब ‘मर्यादा पुरुषोत्‍तम’ की जरूरत

कीर्ति पांडेय | अयोध्‍या में भव्‍य और दिव्‍य Ram Mandir का निर्माण हो गया है और रामलला टाट से अपने ‘नवमहल’ में विराजमान हो गए हैं। Ram Mandir में पूरे विधि-विधान से रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्‍ठा के बाद आराध्‍य राम के दर्शन के लिए भक्‍तों की भीड़ लगी है। 500 वर्षों का इंतजार खत्‍म होने के बाद रघुराई अपने घर में लौटे हैं। देश ही नहीं विदेशों में भी हर तरफ माहौल राममय है। अयोध्‍या की गलियों में तो हर तरफ राम भजनों की गूंज है..।

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राम मंदिर बन जाने के बाद लोग रामराज आने की बात कर रहे हैं..तरह-तरह की कहानियां गढ़ी जा रही हैं, लोग इसे त्रेतायुग आने जैसा बता रहे हैं.. लेकिन, क्‍या से सच है.. नहीं, अभी तो सिर्फ अयोध्‍या में ‘राम’ आए हैं अभी आना बाकी है तो ‘मर्यादा पुरुषोत्‍तम’ का आना!

राम तो सिर्फ अयोध्‍या में आए हैं लेकिन ‘मर्यादा पुरुषोत्‍तम’ का आगमन समूचे भारत होना चाहिए और जिस दिन भारत में मर्यादा पुरुषोत्‍तम का आगमन हो जाएगा उसी दिन से किसी ‘सीता’ का हरण नहीं होगा, कोई सीता ‘वनवास’ नहीं जाएगी, किसी उर्मिला को अपने लक्ष्‍मण के आने के इंतजार में राह नहीं देखनी पड़ेगी।

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अयोध्‍या में तो राम आ गए हैं पर अभी देश में ‘मर्यादा पुरुषोत्‍तम’ का आना बाकी है.. और उस मर्यादा पुरुषोत्‍तम को हमें खुद लाना होगा, हमें अपने अंदर छिपे राम से ‘मर्यादा पुरुषोत्‍तम’ को जगाना होगा तभी अयोध्‍या में राम का आना सफल होग, नहीं तो क्‍या राम और क्‍या ये रामराज और द्वापर और त्रेतायुग की बातें सब बेकार हैं।

 

नोट- ये लेखक के अपने निजी विचार हैं.. इसमें पाठक सहमत और असहमत दोनों हो सकते हैं..

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