टॉप न्यूज़
Trending

कन्याकुमारी में PM Modi की 45 घंटे की ध्यान साधना संपन्‍न

आखिरी दिन PM Modi ने विवेकानंद के छुए पैर

द न्‍यूज ऑन | दिल्‍ली: लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण से पहले PM Modi ध्‍यान साधना के लिए कन्‍याकुमारी पहुंचे थे। आज शाम PM Modi की साधना पूरी हो गई। PM Modi पिछले 45 घंटे से कन्याकुमारी के विवेकानंद रॉक मेमोरियल में ध्यान कर रहे थे। वे तीन दिन ध्यान मंडपम में ही रहे।

इस ध्यान मंडपम की खास बात यह है कि यह वही स्थान है, जहां स्वामी विवेकानंद ने देश भ्रमण के बाद तीन दिनों तक ध्यान किया था।

फेसबुक पर खबरें पढ़ने के लिए हमें फॉलो करें.. https://www.facebook.com/TheNewsOnn/videos/982486390173419/

दूसरे दिन भगवा गमछे में दिखे थे पीएम मोदी

ध्यान साधना के दूसरे दिन की शुरुआत पीएम मोदी ने सूर्य को अर्घ्य देकर किया। पीएम मोदी के ध्यान का भी एक वीडियो सामने आया, वीडियो में पीएम मोदी भगवा कुर्ता और गमछे में थे। कल उन्होंने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष बैठकर ध्यान की। उनके हाथों में माला है और ओम की आवाज गूंज रही थी।

यह भी पढ़ें- https://thenewsonn.com/pm-modi-interview-odisha-ka-bhaag-y-bdlne-vala-hai-pm-modi/

दक्षिण भारतीय परिधान में कन्याकुमारी पहुंच थे

पीएम मोदी गुरुवार को कन्याकुमारी पहुंचे थे। प्रधानमंत्री धोती पहने दक्षिण भारत की पारंपरिक पोशाक में दिखे। उन्होंने ऑफ-व्हाइट रंग का शॉल ओढ़ रखा था। कन्याकुमारी पहुंचने के बाद भगवती अम्मन मंदिर में प्रार्थना और पूजा-अर्चना की। बता दें, आम चुनाव का प्रचार थमने के बाद पीएम मोदी हर बार आध्यात्मिक यात्रा पर जाते हैं और 2019 के चुनाव प्रचार के बाद वे केदारनाथ गए थे और साल 2014 में वे शिवाजी महाराज से संबंधित प्रतापगढ़ गए थे।

यहीं भारत माता के हुए थे दर्शन

भारत दर्शन के दौरान विवेकानंद ने आम लोगों की तकलीफ, दर्द, गरीबी, आत्म सम्मान और शिक्षा की कमी को नजदीक से जाना था। समुद्र तट से करीब 500 मीटर दूर स्थित चट्टान पर विवेकानंद 24 दिसंबर 1892 को तैर कर पहुंचे थे। 25 से 27 दिसंबर तक उन्होंने इसी चट्टान पर ध्यान किया था। उन्होंने यहां भारत के भविष्य के लिए विकसित भारत का सपना देखा था। यह वही जगह है, जहां उन्हें भारत माता के दर्शन हुए थे।

इसी स्थान पर उन्होंने अपना बाकी जीवन लोगों को समर्पित करने का सपना देखा था। विवेकानंद शिला पर विवेकानंद स्मारक बनाने के लिए भी लंबा संघर्ष चला है। इसमें एकनाथ रानाडे ने बड़ी भूमिका निभाई थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
×

Powered by WhatsApp Chat

×